Monday, 31 December 2018

बीरबल की नगरी में पर्यटन की संभावनाएं

(नारनौल . ऐतिहासिकस्थल बीरबल का छत्ता) नारनौल। राजाअकबर के नवर| बीरबल की नगरी नारनौल में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इस ऐतिहासिक नगरी में ऐसी अनेक धरोहर हैं, जिनकी मरम्मत कर पर्यटन केंद्र के रुप में विकसित किया जा सकता है। इस ऐतिहासिक नगरी से सटे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ढोसी पर्वत को हिल स्टेशन के रुप में विकसित किया जा सकता है। ऐसे में यदि सरकार नारनौल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित कर दे तो इस पिछड़े क्षेत्र में विकास के नए द्वार खुलेंगे तथा यहां के बेरोजगार लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही इस क्षेत्र मे सैलानियों के आने से होने वाली आमदनी से सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। इससे शहर के सौंदर्यकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। 
जलमहल को पर्यटन केंद्र बनाने के लिए दो बार प्रयास : जलमहल को तो पर्यटन केंद्र बनाने के लिए प्रशासन की तरफ से एक-दो बार पहल भी की गई थी। जल महल के तालाब में भरी मिट्टी को निकाल कर इसमें पानी भी भरा गया था, लेकिन यह पानी ज्यादा समय तक नहीं रह सका। हालांकि जल महल केसाथ पार्क भी विकसित किया गया है। जो जल महल के सौंदर्यकरण को चार चांद लगा रहा है। जल महल इस पार्क को देखने के लिए रविवार या छुट्टी वाले दिन शहर आसपास के लोग परिवार के साथ आते हैं।

पूर्वपर्यटन मंत्री ने कही थी नारनौल को ट्यूरिस्ट वाक-वे बनाने की बात : नारनौलनगर में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए एवं इस क्षेत्र के लोगों की मांग पर पूर्व पर्यटन मंत्री किरण चौधरी ने यहां पर ट्यूरिस्ट वाक वे बनाने की बात भी कही थी। उस समय पर्यटन मंत्री ने इसको पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत तैयार करने की बात कही थी, लेकिन इसके बाद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। शहर के गणमान्य लोगों का कहना है कि रोजाना सैकड़ों विदेशी सैलानी नारनौल होकर राजस्थान के बीकानेर अन्य शहरों में पर्यटन केंद्रों पर घूमने जाते हैं, ऐसे में विदेशी पर्यटकों को नारनौल शहर के प्रमुख प्राचीन स्थलों को पर्यटन केंद्र के रुप में विकसित कर इनके दर्शन भी कराए जा सकते हैं।

नारनौल में एक बार खोला था पर्यटन केंद्र :दिल्लीसे राजस्थान की ओर जाने वाले विदेशी पर्यटकों की काफी बड़ी संख्या को देखते हुए नारनौल के नसीबपुर में सरकार ने (फाख्ता) मोरनी कांप्लेक्स के नाम से एक पर्यटन केंद्र की स्थापना की थी। यह पर्यटन केंद्र करीब 16 साल पहले बनाया गया था, लेकिन नसीबपुर की तरफ पर्यटकों के जाने तथा शहर से बाहर पड़ने के कारण यह पर्यटन केंद्र ज्यादा दिन नहीं चल पाया। फिलहाल इसका भवन एक खंडहर का रूप ले चुका है तथा यहां पर चारों तरफ गंदगी का आलम है।

दोनों स्मारकों को पुरातत्व विभाग ने संरक्षण में लिया : '' बीरबलके छत्ते जल महल के गौरवमयी इतिहास को देखते हुए पुरातत्व विभाग ने दोनों स्मारकों को अपने संरक्षण में ले लिया है। पुरातत्व विभाग बीरबल के छत्ते की मरम्मत करवाने की योजना तैयार कर रहा है। बीरबल के छत्ते की मरम्मत कर इसे अच्छे पर्यटन केंद्र के रुप में विकसित किया जा सकता है। ''-प्रेमचंद, परिचर, पुरातत्व विभाग, नारनौल।

जिले में ये हैं ऐतिहासिक स्थल

किबीरबल की नगरी नारनौल में राय बालमुकुंद का छत्ता (बीरबल का छत्ता), चोर गुंबद, जल महल, शाह कुली खां का मकबरा, पीर तुर्कमान की दरगाह तख्त वाली बावड़ी ऐतिहासिक स्मारक हैं। इनके अलावा शहर से मात्र 8 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध धार्मिक स्थल च्यवन ऋषि की तपोभूति ढोसी धाम प्रसिद्ध संत बाबा रामेश्वरदास जी का ऐतिहासिक मंदिर है। इनमें से बीरबल का छत्ता, जल महल, ढोसी पर्वत बाबा रामेश्वरदास के मंदिर को पर्यटन केंद्र बनाया जा सकता है।

दिल्ली जयपुर निकलती

हैं बीरबल छत्ते की सुरंग : बीरबल के छत्ते का गौरवमय इतिहास रहा है। बताया जाता है कि बीरबल के छत्ते के अंदर चारों तरफ सुरंग है। इस सुरंग का एक रास्ता दिल्ली तो दूसरा जयपुर जाकर खुलता है। इसके गौरवमय इतिहास की कहानी सुन कर दूर-दूर से लोग इसे देखने आते हैं, लेकिन आमजन के लिए इसके दरवाजे लंबे समय से बंद किए गए हैं। इसके अलावा यहां स्थित चोर गुंबद का भी गौरवमयी इतिहास है। ऐसे में सरकार को नारनौल को पर्यटन केंद्र बनाने के लिए थोड़े से प्रयास की जरूरत है। इसके बाद देश के साथ-साथ विदेशी सैलानी स्वयं यहां पहुंच जाएंगे।